कर्मों के फल,से न बच सका है कोई,
लाख बुने मन में कपट जाल कोई,
कोई भी चतुराई काम न आती है,
जब लाठी प्रभु की पढ़ जाती है,
जितनी शीघ्र हम उस परम शक्ति को पहचान लें ,
हरी की इच्छा को को जान लें ,
ये संसार तो रैन बसेरा है.
यहाँ कुछ नहीं मेरा है,यदि ,
हम दूसरों से पहले अपनी सुध लें
हर ले को अपने संवार लें,
प्रण कर ले यदि हम अपने मन में
बेफिक्र हो जी सकेंगे हर जनम में|
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