Happiness is that ray of sunshine that dispels darkness and gloom of suffering and failure of life.
About Ritu Jain!
- Ritu Jain " Mystic Colors Of Life"
- New Delhi, India
- I am Ritu Jain,48 years and happily married . I live in Delhi. A Housewife who is a Psychology Hons. Graduate and wants to bring cheer and smile to every person who does not have one.Being creative is my lifeline. I am very happy today that I have launched my own Blog, to share my poems,thoughts,experiences and various colors in my life.
Saturday, September 3, 2011
Friday, September 2, 2011
Wednesday, August 31, 2011
Tuesday, August 30, 2011
Monday, August 29, 2011
Saturday, August 27, 2011
Friday, August 26, 2011
Thursday, August 25, 2011
Wednesday, August 24, 2011
Sunday, August 21, 2011
Saturday, August 20, 2011
Friday, August 19, 2011
Wednesday, August 17, 2011
सुख-दुःख का ताना-बाना है,जिंदगी
खुद मिटकर भी, किसी के काम आना है,जिंदगी
किसी रोते को हँसाना है,जिंदगी
किसी भूखे को भरपेट खिलाना है,जिंदगी
किसी प्यासे की प्यास बुझाना है,जिंदगी
किसी व्यथित के आंसू पोंछना है,जिंदगी
किसी के जीवन में खुशियों के फूल खिलाना है,जिंदगी
किसी की आत्मा न दुखाना है,जिंदगी
प्रभु का नाम हर पल सुमिरन कर,
प्रेम बांटकर,संतुष्टि से जीना है,जिंदगी|
खुद मिटकर भी, किसी के काम आना है,जिंदगी
किसी रोते को हँसाना है,जिंदगी
किसी भूखे को भरपेट खिलाना है,जिंदगी
किसी प्यासे की प्यास बुझाना है,जिंदगी
किसी व्यथित के आंसू पोंछना है,जिंदगी
किसी के जीवन में खुशियों के फूल खिलाना है,जिंदगी
किसी की आत्मा न दुखाना है,जिंदगी
प्रभु का नाम हर पल सुमिरन कर,
प्रेम बांटकर,संतुष्टि से जीना है,जिंदगी|
Tuesday, August 16, 2011
Monday, August 15, 2011
Friday, August 12, 2011
सपने तो सपनें हैं,
कहने को तो अपने हैं,
क्योंकि अपनी ही आँखों में पलतें हैं ये,
पर,इनमें से कुछ ही हकिकात में बदलतें हैं,
निंदिया से चोली-दामन का साथ है इनका,
तभी तो इसका साथ पाकर निखरतें हैं,
जीवन के हर मोड पर संग रहतें हैं ये,
मौन सी भाषा में,चुपके से कुछ कहते हैं ये,
बचपन और जवानी में बिन पंखों के उडतें हैं ,
सपने तो सपने हैं.........
कहने को तो अपने हैं,
क्योंकि अपनी ही आँखों में पलतें हैं ये,
पर,इनमें से कुछ ही हकिकात में बदलतें हैं,
निंदिया से चोली-दामन का साथ है इनका,
तभी तो इसका साथ पाकर निखरतें हैं,
जीवन के हर मोड पर संग रहतें हैं ये,
मौन सी भाषा में,चुपके से कुछ कहते हैं ये,
बचपन और जवानी में बिन पंखों के उडतें हैं ,
सपने तो सपने हैं.........
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