About Ritu Jain!

New Delhi, India
I am Ritu Jain,48 years and happily married . I live in Delhi. A Housewife who is a Psychology Hons. Graduate and wants to bring cheer and smile to every person who does not have one.Being creative is my lifeline. I am very happy today that I have launched my own Blog, to share my poems,thoughts,experiences and various colors in my life.

Monday, August 30, 2010

रिश्तों का ताना-बाना है,
जकड़े हैं हम इंसान जिसमे,
बेड़ियाँ है,प्यार-मुहब्बत की,
बंधें हैं,हम इंसान जिसमें,
जीने का बहाना बन जाते हैं,
ये रिश्ते कभी-कभी,
जी का जंजाल लगने लगते हैं,
ये छल करने वाले रिश्ते कभी-कभी|
When you arise in the morning,think of what a precious privilege it is to be alive,to breathe,to think,to enjoy,to love.

Sunday, August 29, 2010

कभी तो ख़ुशी के मारे झूमने लगता है,
ये दिल,
कभी हालात से मजबूर होकर रोने लगता है,
ये दिल,
कभी किसी की अनकही बातें भी समझने लगता है,
ये दिल,
कभी किसी के पास होकर भी,उससे कोसों दूर होता है,
ये दिल,
कभी किसी से दूर होकर भी,उसके पास होता है ,ये दिल.
दिल की बातें दिल ही जाने,
हम तो बस इतना ही समझ पाएं है,
हर हाल में,हर जगह तुम्हें ही ढूँढता है हमारा,नादान दिल|
If you want your children to improve, let them overhear the nice things you say about them to others.

Saturday, August 28, 2010

If money is your hope for independence you will never have it.The only real security that a man will have in this world is a reserve of knowledge,experience and ability.

कभी देना हो रूह को सच्चा सुकून,तो 
देखो उगते हुए सूरज को,
फूल को खिलते हुए,
ओस की बूँद को पत्ते पर गिरते हुए,
पहाड़ों की बर्फ को पिघलते हुए,
मोर को पंख फैलाकर नाचते हुए,
किसी पपीहे को गाते हुए,
किसी को तुम्हारी वजह से मुस्कुराते हुए,
बादलों को मस्ती से बरसते हुए,
माँ का अपने कलेजे के टुकड़े को गले से लगाते हुए|

The whole world steps aside for the man who knows where he is going.
उस बच्चे की आँख में देखकर आंसू,
मन मेरा रोने लगा,
उसके जख्म से बहते लहू को देखकर,
मुझे कुछ होने लगा,
दुनिया वालों के सितम देखकर,
मेरे इंसानियत से विश्वास उठने लगा|

Friday, August 27, 2010


मस्तिष्क के हज़ारों नेत्र होतें हैं और हृदय का एक,परुन्तु प्रेम के समाप्त होते ही सम्पूर्ण जीवन का प्रकाश समाप्त हो जाता है|
बुडापे ने,तन को असहाय बना दिया,
बुडापे ने,बहुत से अपनों का प्रेम छुड़ा दिया,
जो बच्चे दम भरते थे,बुडापे में अंधे की लाठी बनने का,
वक़्त आने पर,उन सबने अंगूठा दिखा दिखा दिया,
अपना ही शरीर क्षीण होकर दगा देने लगा जब,
उसके सगे ही,धीरे-धीरे उससे दूर जाने लगे सब|

Thursday, August 26, 2010

Crystals,carpets and chandeliers make a nice house but only the smiles on the faces of the residents make it a home.
प्रकृति की छटा है निराली,
चारों ओर छाई है हरियाली,
रंग-बिरंगे फूल बागों को सजाने लगे,
भँवरे भी मस्त होकर गाने लगे,
कीट-पतंगे गुनगुनाने लगे,
ठंडी हवाएं,पिया से मिलने की आस जगाने लगीं,
तुम्हारे दर्शन के प्यासे,हमारे नैना फिर से बहने लगे|

Wednesday, August 25, 2010

There is no love without forgiveness and no forgiveness without love.
जीवन की अंधी दौड़ में,
अपनी सुध-बुध खोकर 
अपने लक्ष्य से भटक गया इंसान,
उलझनों का पहाड़ खुद बनाकर,
फंसकर अपने ही बुने ज़ाल में,
कष्टों में घिर गया इंसान,
खोज रहा,सही राह,विक़ल हुआ
प्रभु को पुकार रहा हर इंसान|

Tuesday, August 24, 2010

Laugh as much as you breathe and love as long as you live.
आता रहे रक्षाबंधन का त्यौहार,
,कलाई भाइयों की सजी रहे,
बहनों का प्रेम सदा रेशमी धागों के संग गुंधा रहे,
प्यार भाई-बहनों का सदा बना रहे
आता रहे सदा रक्षाबंधन......
Happy Rakshabandhan!

Monday, August 23, 2010

तूफानों से टकरा जाएंगे हम,
गर यूहीं मिलता रहा साथ तुम्हारा,
सब छोटी-बड़ी मुश्किलें दूर कर पाएंगे हम,
गर प्यार यूहीं मिलता रहा तुम्हारा,
शीघ्र ही किनारे मिल जाएंगे,हमें
गर मरते दम तक न छूटा हाथ तुम्हारा|
Politeness is to human nature,what warmth is to wax.

Sunday, August 22, 2010

Love the moment and the energy of that moment will spread beyond all boundaries into blissful,peaceful happiness.
आसमान के हैं,परिन्दें
परिंदों का है आसमान,
हम चाहें,तो अपने 
मनोबल से छू सकते है आसमान,
मुश्किल कुछ नहीं,बस कुछ 
कदम दूर है,मंजिल अपनी
हौसले और दृड़ निश्चय से 
बदलनी होगी किस्मत अपनी|
Worry is like a rocking chair,it gives you something to do,but it doesn't get you anywhere.

Saturday, August 21, 2010

दो दिलों को जो जोड़ता है,
वह प्रेम है,
जिसके आगे हर कोई झुकता है,
वह प्रेम है,
हर रिश्ते की जो बुनियाद है,
वह प्रेम है,
जन्म से मृत्यु तक,हमें दरकार रहती है जिसकी,
वह प्रेम है,
जो सबसे अनमोल है,हर किसी के लिए,
वह केवल प्रेम है|

Friday, August 20, 2010


जीवन,पथरीली ज़मीन है,किसी के लिए
जीवन,मखमल सा नरम है,किसी के लिए
जिंदगी,कड़ी धूप सी चुभती है किसी को,
जिंदगी,ठंडी छाँव सी लगती है किसी को,
फूल सी कोमल प्रतीत होती है,जिंदगी किसी को
काँटों सी चुभती है ,जिंदगी किसी को,
लेकिन सच तो ये है,
अपने ही कर्मों का लेखा-जोखा है जिंदगी,
कभी न कभी आइना दिखाती है,सभी को|
Criticism,like rain should be gentle enough to nourish a man's growth without destroying his roots.
 
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