About Ritu Jain!

New Delhi, India
I am Ritu Jain,48 years and happily married . I live in Delhi. A Housewife who is a Psychology Hons. Graduate and wants to bring cheer and smile to every person who does not have one.Being creative is my lifeline. I am very happy today that I have launched my own Blog, to share my poems,thoughts,experiences and various colors in my life.

Thursday, August 19, 2010

माँ है तो,बरसती हैं खुशियाँ 
घर-आँगन में,
माँ है तो,आती है खुशबू
हर ओर से,
माँ है तो,उमंग है जीवन 
जीने में,
माँ है तो,रौशन है दिल की 
दुनिया,अनगिनत चरागों से|
Speak little,serve more,and love without ceasing!Find fault with no one,smile all the time and rejoice in whatever
the Will of God bringsto you-andyour heart will be asinging heart.It will keep on singing.

Wednesday, August 18, 2010


परेशान वो नहीं,
जिनके पास कम है,
परेशान हैं वो,
जिनके पास है,आवश्यकता से बहुत अधिक,
करने को कुछ नहीं,सही दिशा देना मन को आया नहीं,
सुखो के भण्डार से,एक कतरा सुख का मिल पाया नहीं,
काश,वो महसूस कर पाते,पीर दुखी और बदनसीबों की,
शायद उन्हें,
सही दिशा मिल जाती,सार्थक जीवन जीने की|
Life is a school and experience is our teacher,but the fees we have to pay are quite high.

Tuesday, August 17, 2010

कैसा सन्नाटा पसरा है,
उस नन्ही सी चिड़िया के घोंसले में,
जिसका मासूम सा बच्चा उठा कर,
ले गया वोह,निर्दयी काला कौआ,
न सोचा उसने इक पल को भी,
उस बच्चे के माँ-बाप के संताप से,
भरे दिलों के बारे में,
न सोचा उसने इक पल को भी,
जीते-जी अपनी संतान से जुदा होनेवाले,
किस्मत के मारों के बारे में,
हे प्रभु,कुछ करो,
दुःख दूर करो,उन असहाय पक्षियों के|
Go into any relationship looking at what you can give and not what you can receive.The more you give,the more you will be given.The creator serves those who serve the creation.So' Live to give.'

Monday, August 16, 2010

न जाने कैसा अध्भुद सुख अनुभव 
करती है ये आँखें,देख कर तुम्हे
न जाने कैसा करार प्राप्त करता 
है ये दिल,साथ पाकर तुम्हारा
न जाने कौन सा सुकून हासिल 
होता है हमें,लेकर नाम तुम्हारा|
Here on earth we are judged by the number of people who serve us.There in the kingdom of God we will be judged by he number of people we served.

Sunday, August 15, 2010

अभी तो बहुत आगे जाना है,
हमें,
अभी तो बहुत से तूफानों से टकराना है,
हमें,
अभी तो बहुत सी चट्टानों का सीना चीरना होगा,
हमें,
उमीदों से आसमान को,और हिम्मत से धरती को सींचना होगा,
हमें|
Two things are essential to our happiness and peace of mind-Love and Work.We must forget ourselves and love others-without any thought of return.And we must do our work in love for God.
Happy Independence Day!

Saturday, August 14, 2010

अक्सर देखा है,
दुनिया रोते को और रुलाती है,
दुखियों,के दिल को और दुखाती है,
बदनसीबों को,उनकी बदनसीबी और याद दिलाती है,
दुनिया का क्या है,
ये तो हँसनेवालों को भी,हँसता हुआ कहाँ देख पाती है|
Life is full of twists and turns,
As everyone of us sometimes learns,
Never give up,no matter,if the pace becomes slow,
You will surely succeed with another blow.

Friday, August 13, 2010

सावन की आई है बयार,
बाग़ों में छाई है बहार,
बादलों का होने लगा शोर,
नाचने लगे,मस्त होकर मोर,
हिंडोले पड़ने लगे,गोरियाँ 
गाने लगी होकर,भावविभोर 
वर्षा की बूँदें,प्रीत का सन्देश लेकर आईं,
ठंडी हवाएं,पिया का सन्देश लेकर आईं,
सावन की आई है बयार....
Life is too short to be spent in fault finding.holding grudges or keeping memory of wrongs done to us.

Thursday, August 12, 2010

तुम्हारे प्रेम के कारण ही,
चल पाई है नाव जीवन की,
तुम्हारे विश्वास के बल पर ही,
चल पाई है नाव हमारे जीवन की,
तुमसे  अथाह सम्मान पाकर ही,
उमंग और उत्साह से चला पाएं हैं,
नाव अपने जीवन की|

The wise man makes complicated things simple,the unwise man makes simple things complicated.

Wednesday, August 11, 2010

उजाले कहाँ हैं,पूछते हैं
अंधेरों में घिरे हैं जो,
किनारे कहाँ हैं,पूछते है,
मझधार में फंसे हैं जो,
सपनों की दुनिया कहाँ हैं,पूछते हैं,
कड़वी हकीक़त से टकराकर बिखर चुकें हैं जो,
बहार कहाँ है,रोकर पूछता है,
पतझड़,सूना-सूना सा लगता है जो,
अक्सर,कोई अपना ढूँढता है,दिल
अजनबियों की दुनिया में,खो गया है जो|
No external thing can hurt you unless you give it the power to hurt.
एक व्यक्ति खुद को दुनिया का सबसे दुखी आदमी समझता था|उसने एक दिन परमात्मा से प्रार्थना की,'हे प्रभु,मेरे सिवाय दुनिया में सभी सुखी नज़र आतें हैं,तू मुझे इतना दुःख न दे की मैं सह न सकूं|एक कृपा कर,तू मुझे किसी और का दुःख दे दे|मेरा दुःख किसी और को दे दो|'रात में उसने एक स्वप्न देखा|एक कमरे में चारों ओर बहुत सी खूटियाँ लगीं थी|उस कमरे में जो भी आता उसकी पीठ पर दुखों की गठरी बंधी थी|सभी आकर अपनी दुखों की गठरी किसी खूँटी पर टांगते और बैठ जाते|उस व्यक्ति ने अपनी दुखों की गठरी भी वहां टांग दी| तभी वहां एक आवाज़ गूंजी,जिसे भी अपनी गठरी बदलनी हो बदल लो,चलो एक-एक गठरी उठा लो|सभी गठरियाँ उठाने दौड़े,पर सभी ने अपनी-अपनी गठरी उठाई,किसी दूसरे की गठरी को हाथ नहीं लगाया|उसी समय उस व्यक्ति की नींद टूट गयी,वह स्वप्न का आशय समझ गया|उसे समझ में आ गया की दुखी होने का कोई अर्थ नहीं है,दुनिया में हर कोई दुखी है|बेहतर है की दुखों से संघर्ष करके सुख की खोज की जाए|
The right way to live is to move forward and greet every experience-pleasant or painful with a grateful  heart.
Sympathy is a great healer.Keep on giving it to every sick person-also to every healthy one you meet!

Tuesday, August 10, 2010

दस्तक देता है,नसीब सबका
यह और बात है,
उसे सुने न सुने कोई,
कोई जब दिल दुखाता है किसी का,
अंतरात्मा  कचोटती है,उसकी जरूर,
अनसुनी कर दे वो,तो और बात है,
दुखों से छूट सकता दामन उसका,
यदि हर कोई सुखों में भी,
उस पालनहारे का सुमिरन कर पाए,तो क्या बात है|
Each day comes bearing its own gifts,we just have to untie the ribbons.

Monday, August 9, 2010

इंसानी रिश्तों का अजब सा मायाजाल देखा,
प्रेम-प्यार के नाम पर,हर तरफ छलावा देखा,
गिले-शिकवे एक दूसरे से करते,थकते नहीं लोग,
इंसान तो क्या,भगवान् के नाम पर भी ठगते हैं लोग,
न जाने क्यों,सुख-शान्ति भूलकर,
लड़ने-झगड़ने को तुला है हर इंसान,
मद और क्रोध के वश में होकर,भटक रहा हर इंसान|
 
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