About Ritu Jain!

New Delhi, India
I am Ritu Jain,48 years and happily married . I live in Delhi. A Housewife who is a Psychology Hons. Graduate and wants to bring cheer and smile to every person who does not have one.Being creative is my lifeline. I am very happy today that I have launched my own Blog, to share my poems,thoughts,experiences and various colors in my life.

Saturday, January 16, 2010

हर तमन्ना,कभी किसी की पूरी नहीं होती,
जैसे दिल की हर चाहत कभी पूरी नहीं होती,
सपनों की असीमित उड़ान,कभी हकीक़त नहीं बनती,
परन्तु,
गर प्रेम, लगन और हिम्मत हो इंसान के पास,तो
कोई ऐसी ख़ुशी नहीं जो हासिल नहीं हो सकती|

क्षणभंगुर होकर भी पानी का बुलबुला 
देता बहुत सा ज्ञान,
जीवन की आपाधापी में,असली मूल्यों को
भूल गया इंसान,
माया-मोह में उलझकर,तेरे-मेरे में लगा रहा,
असंतोष मन में भरकर,तृष्णाओं के पीछे भटकता रहा|

Friday, January 15, 2010

O God,give us the serenity to accept what cannot be changed,courage to change what should be changed,and wisdom to distinguish the one from the other.

तनहा बहुत थे हम,तुम्हारे आने से 
जैसे दूर हो गए सब गम,
सरगम सी बजने लगी,हवाओं में,
मदहोशी सी छाने लगी फिजाओं में,
बागों में,कलियाँ फूल बनकर मुस्कुराने लगी,
मन में प्रेम की तरंगें हिलोरे खाने लगीं,
हर दिशा से,बस खुशबू ही खुशबू आने लगी,
तुम क्या आए,हर ओर खुशियाँ ही खुशियाँ छाने लगीं|

Wednesday, January 13, 2010

न जाने क्यों बचपन भुलाए नहीं भूलता,
दिन-भर गिल्ली-डंडा खेलना,
तितलियों के पीछे-पीछे भागना,
कभी पतंग उड़ाना,तो कभी कागज़ की 
नाव को पानी में तैराना,
घंटों अपने संगी-साथियों के साथ बतियाना,
वो चंदा को मामा कहकर बुलाना,
न जाने क्यों बचपन.........

Tuesday, January 12, 2010

रिश्ते कभी कुछ कहने को मजबूर करते हैं,
रिश्ते कभी चुप रहने को मजबूर करतें  हैं,
उनको निभा पाओ,तो ठीक
वरना,बेजार जीवन को कर देतें हैं|

Monday, January 11, 2010

जिंदगी के अनेक रूप हैं,
अधिकतर लोग बीते हुए कल
को याद करके जीतें हैं,
विरले हैं,वो जो वर्तमान 
में रहना जानते हैं,
हर किसी को आगे बढने का मौका,
जिंदगी देती ज़रूर है,
अधिकतर उसे अनदेखा करके चल देतें हैं,
वही फिर भगवान् या भाग्य को जीवन भर दोष देतें हैं|

त्याग,प्रेम,करुणा की देवी बनकर 
नारी ने बड़े दुःख हैं सहे,
 पर अपने ऊपर हो रहे अत्याचार 
को देखकर वो चुप क्यों रहे,
क्यों न वो अपने अधिकारों की
रक्षा केलिए आवाज़ उठाए,
जागो नारी,शक्ति बनकर,
तुम भी जीना सीखो,
शान से सिर उठाकर|

Sunday, January 10, 2010

हथौड़ा चलाते हुए मजदूर के हाथों को,
देखो कभी,
भूखे पेट कितना पसीना बह गया उसका,
देखो कभी,
न गर्मी,न सर्दी,न बरसात में रुकते उसके हाथ  कभी,
ऐसा लगता है जैसे,आराम,नींद,चैन उससे कोसों दूर हैं सभी|

Saturday, January 9, 2010

क्यों न हम अपने जीवन की कहानी 
खुद लिखें,
हिम्मत और परिश्रम की स्याही से,
क्यों न दूसरों के दोषों को नज़रंदाज़ करके,
अपने दोषों को कम करनें का प्रयत्न करें,
किसी ज़रूतमंद के काम आकर,दुनिया के
गम कुछ कम करें,
फूल बिछाएं जिस राह से गुजरें हम,
सिर्फ खुशियाँ ही खुशियाँ बाँटें हम|

पेड़ की शाख से किसी पत्ते का टूटना,
किसी के हाथ से किसी का हाथ छूटना,
दोनों जुदाई के ही दो रूप हैं,
एक में केवल साथ छूटता है,
दूसरे में तो,
दिल भी साथ टूटता है|

Friday, January 8, 2010

चांदनी गुनगुनाने लगी,
शहनाइयाँ बजनें लगतीं हैं,
आहट सुनकर तेरे आने की,
तुम सपने में भी न सोचना कभी,
हमसे दूर जाने की|

Anyone can learn to be a good speaker,but how many live in a manner that others can learn from.

सूरज और चाँद का अम्बर पर आना,
कितना सुख देता है हमें,
हवा घुंघरू बाँध के छम-छम करती आती है,
सुकून कितना मन को देकर जाती है,
ये ऊंचे पहाड़,ये नदियाँ,ये झरने,
हरियाली का बिछोना ओढ़े है खड़ी ये
 धरती,प्रकृति के बेमिसाल रूप के क्या कहने|
If the entire world is not beautiful,don't bother.Create your own beautiful world.

Thursday, January 7, 2010


कभी गर्मी,तो कभी सर्दी,
सावन आया,फिर पतझर 
न जाने कितने मौसम आकर 
अपनी-अपनी  सौगातें देकर चले गए,
बस एक ही आरज़ू है इस दिल की,
तुम्हारे प्यार की सतरंगी धुनें,सदा
हर मौसम में बजतीं रहें,
सदा यूंही, हमारे जीवन को मह्कातीं रहें|

परिश्रमी और धीर व्यक्ति को संसार में कुछ भी अपाप्य नहीं है|

जिंदगी आज ख़त्म हो जाए,
हमें कोई गम नहीं,
क्योंकि हम जान चुके हैं,की
हम किसी से कम नहीं,
हमने जीवन में ,
जो चाहा,वो पाया है,
वो और बात है की,
हमें अपनों ने बहुत सताया है|

माता-पिता,गुरु और पीड़ितों की यथाशक्ति जीवनपर्यन्त सेवा करनी चाहिए|

Wednesday, January 6, 2010


ठण्ड पड़ रही है कड़ाके की,
कोहरे की घनी चादर से लिपटी है धरती,
बर्फ ने ढक रखा है,पर्वतों को,
हर मनुष्य मांग रहा पनाह इस सर्दी से,
मौसम के मिजाज़ का बदलने का इंतज़ार है,
हर किसी को,
जैसे किसी प्यासे को सावन का हो इंतज़ार,
थोड़ी सी धूप या कृपा सूर्यदेव की, राहतदे सकती है,
हर किसी को|

आशा और उम्मीद न छोड़ो तुम,
कभी किसी का दिल न तोड़ो तुम,
जीवन में,केवल खुशियों से ही नहीं
ग़मों से भी नाता जोड़ो तुम,
अपने दुःख-दर्द भूलकर,दूसरों 
के बारे में भी सोचो तुम,
खुद से कुछ पल दूर होकर,
प्रेम औरों में भी बांटों तुम|

Crystals,carpets and chandeliers make a nice house but only the smiles on the faces of the residents make it a home.

Tuesday, January 5, 2010

दिल की धड़कनों में तुम,
मेरे हर ख्वाहब में तुम,
मेरे हर सुख-दुःख में
मेरे साथ हो तुम,
जीवन के हर उतार-चडाव
मेरे बहुत पास हो तुम,
आसमान के तारे की तरह दूर हो,
फिर भी मेरे हृदय के करीब हो तुम|

True wisdom is freedom from self-esteem,hypocrisy and injury to others.

When you look at the bright side of things,you will keep on counting your blessings.And when you realize how truly blessed you are,you will not easily yield to irritation and annoyance.

 
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