About Ritu Jain!

New Delhi, India
I am Ritu Jain,48 years and happily married . I live in Delhi. A Housewife who is a Psychology Hons. Graduate and wants to bring cheer and smile to every person who does not have one.Being creative is my lifeline. I am very happy today that I have launched my own Blog, to share my poems,thoughts,experiences and various colors in my life.

Wednesday, January 20, 2010

जिंदगी धन और सत्ता के संचय का नाम नहीं बल्कि आशीर्वादों के मोतियों को एकत्र करने का नाम है|

जीवन में कुछ ऐसे लोग भी मिलतें हैं,
जिनसे कुछ ऐसा सम्बन्ध हो जाता है,
लाख चाहने पर भी जो तोड़ा नहीं जाता है,
कहने को तो ,
हर आने वाला चला जाता है,
पर कुछ जानेवाले,एक गहरी याद
दिल में छोड़ जातें हैं|
Friendship is like relation between hand and eyes.When the hand gets hurt,the eye cries and when the eye cries the hand wipes its tears.


जिंदगी एक सपन है सलोना,
हर तरफ फैलीं हैं,खुशियाँ ही खुशियाँ
यदि हम उन्हें,भरना चाहें अपने दामन में,
प्रेम के फूलों को खिलने दे यदि हम,
अपने दिल की बगिया में,
सुनहरी किरणें,भर देंगी उजाला बहुत सा,
जीवन की राहों में,हम सब की हमेशा|

Tuesday, January 19, 2010

Happiness is like a radio-station,broadcasting all the time.You just have to learn how to tune in and receive it properly.Stay tuned and be happy always.

कहाँ है,मन का मीत मेरा 
जो सदा गुनगुनाया,वो गीत मेरा,
प्यार तो बहुत था दिल में तुम्हारे लिए,
चाहकर भी इज़हार,
होठों पर कभी न आ पाया,तुम्हारे लिए|

Monday, January 18, 2010

मन भागता फिरता है,दूर गगन की छाँव में,
उसे शांत कैसे करू,उसे कैसे समझाऊँ मैं,
तारों की चमक देखकर,मेरे मन में जागी है ललक,
दूर आसमान में कहीं,मैं भी एक चमकता तारा बन जाऊं,
परन्तु,
इस चंचल,दीवाने मन को कैसे समझाऊँ,
जीने का राज़,मैं उसे कैसे बताऊँ|

Sunday, January 17, 2010


गैरों से कैसा गिला,
जब अपनों से ही सहारा न मिला,
दिल की बगिया,सूनी थी,सूनी ही रही,
आँखें बरसतीं रहीं,पर लब खामोश रहे,
तुमसे कहना तो बहुत कुछ था,
हम अपनी ही उलझनों में उलझे रहे,
और चाहते हुए भी कुछ न तुमसे कह सके|

Strength is life,weakness is death.
Dream makes all things possible.
Hope makes all things work.
Love makes all things beautiful.
Smile makes all above work possible.

जहाँ भी देखो,लोगों के हुजूम नज़र आते हैं,
हर गली,हर रास्ते पर लोग ही लोग नज़र आतें हैं,
न जाने कहाँ जा रहें हैं सब के सब,
लगता है जैसे,अपना चैन खो चुकें हैं सब,
इस भीड़ में लोगों की,कोई अपना दिखता नहीं,
इंसान है बहुत,पर इंसानियत कोई रखता नहीं|

Saturday, January 16, 2010

हर तमन्ना,कभी किसी की पूरी नहीं होती,
जैसे दिल की हर चाहत कभी पूरी नहीं होती,
सपनों की असीमित उड़ान,कभी हकीक़त नहीं बनती,
परन्तु,
गर प्रेम, लगन और हिम्मत हो इंसान के पास,तो
कोई ऐसी ख़ुशी नहीं जो हासिल नहीं हो सकती|

क्षणभंगुर होकर भी पानी का बुलबुला 
देता बहुत सा ज्ञान,
जीवन की आपाधापी में,असली मूल्यों को
भूल गया इंसान,
माया-मोह में उलझकर,तेरे-मेरे में लगा रहा,
असंतोष मन में भरकर,तृष्णाओं के पीछे भटकता रहा|

Friday, January 15, 2010

O God,give us the serenity to accept what cannot be changed,courage to change what should be changed,and wisdom to distinguish the one from the other.

तनहा बहुत थे हम,तुम्हारे आने से 
जैसे दूर हो गए सब गम,
सरगम सी बजने लगी,हवाओं में,
मदहोशी सी छाने लगी फिजाओं में,
बागों में,कलियाँ फूल बनकर मुस्कुराने लगी,
मन में प्रेम की तरंगें हिलोरे खाने लगीं,
हर दिशा से,बस खुशबू ही खुशबू आने लगी,
तुम क्या आए,हर ओर खुशियाँ ही खुशियाँ छाने लगीं|

Wednesday, January 13, 2010

न जाने क्यों बचपन भुलाए नहीं भूलता,
दिन-भर गिल्ली-डंडा खेलना,
तितलियों के पीछे-पीछे भागना,
कभी पतंग उड़ाना,तो कभी कागज़ की 
नाव को पानी में तैराना,
घंटों अपने संगी-साथियों के साथ बतियाना,
वो चंदा को मामा कहकर बुलाना,
न जाने क्यों बचपन.........

Tuesday, January 12, 2010

रिश्ते कभी कुछ कहने को मजबूर करते हैं,
रिश्ते कभी चुप रहने को मजबूर करतें  हैं,
उनको निभा पाओ,तो ठीक
वरना,बेजार जीवन को कर देतें हैं|

Monday, January 11, 2010

जिंदगी के अनेक रूप हैं,
अधिकतर लोग बीते हुए कल
को याद करके जीतें हैं,
विरले हैं,वो जो वर्तमान 
में रहना जानते हैं,
हर किसी को आगे बढने का मौका,
जिंदगी देती ज़रूर है,
अधिकतर उसे अनदेखा करके चल देतें हैं,
वही फिर भगवान् या भाग्य को जीवन भर दोष देतें हैं|

त्याग,प्रेम,करुणा की देवी बनकर 
नारी ने बड़े दुःख हैं सहे,
 पर अपने ऊपर हो रहे अत्याचार 
को देखकर वो चुप क्यों रहे,
क्यों न वो अपने अधिकारों की
रक्षा केलिए आवाज़ उठाए,
जागो नारी,शक्ति बनकर,
तुम भी जीना सीखो,
शान से सिर उठाकर|

Sunday, January 10, 2010

हथौड़ा चलाते हुए मजदूर के हाथों को,
देखो कभी,
भूखे पेट कितना पसीना बह गया उसका,
देखो कभी,
न गर्मी,न सर्दी,न बरसात में रुकते उसके हाथ  कभी,
ऐसा लगता है जैसे,आराम,नींद,चैन उससे कोसों दूर हैं सभी|

Saturday, January 9, 2010

क्यों न हम अपने जीवन की कहानी 
खुद लिखें,
हिम्मत और परिश्रम की स्याही से,
क्यों न दूसरों के दोषों को नज़रंदाज़ करके,
अपने दोषों को कम करनें का प्रयत्न करें,
किसी ज़रूतमंद के काम आकर,दुनिया के
गम कुछ कम करें,
फूल बिछाएं जिस राह से गुजरें हम,
सिर्फ खुशियाँ ही खुशियाँ बाँटें हम|

पेड़ की शाख से किसी पत्ते का टूटना,
किसी के हाथ से किसी का हाथ छूटना,
दोनों जुदाई के ही दो रूप हैं,
एक में केवल साथ छूटता है,
दूसरे में तो,
दिल भी साथ टूटता है|

Friday, January 8, 2010

चांदनी गुनगुनाने लगी,
शहनाइयाँ बजनें लगतीं हैं,
आहट सुनकर तेरे आने की,
तुम सपने में भी न सोचना कभी,
हमसे दूर जाने की|

Anyone can learn to be a good speaker,but how many live in a manner that others can learn from.

सूरज और चाँद का अम्बर पर आना,
कितना सुख देता है हमें,
हवा घुंघरू बाँध के छम-छम करती आती है,
सुकून कितना मन को देकर जाती है,
ये ऊंचे पहाड़,ये नदियाँ,ये झरने,
हरियाली का बिछोना ओढ़े है खड़ी ये
 धरती,प्रकृति के बेमिसाल रूप के क्या कहने|
If the entire world is not beautiful,don't bother.Create your own beautiful world.

 
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