About Ritu Jain!

New Delhi, India
I am Ritu Jain,48 years and happily married . I live in Delhi. A Housewife who is a Psychology Hons. Graduate and wants to bring cheer and smile to every person who does not have one.Being creative is my lifeline. I am very happy today that I have launched my own Blog, to share my poems,thoughts,experiences and various colors in my life.

Thursday, January 7, 2010


कभी गर्मी,तो कभी सर्दी,
सावन आया,फिर पतझर 
न जाने कितने मौसम आकर 
अपनी-अपनी  सौगातें देकर चले गए,
बस एक ही आरज़ू है इस दिल की,
तुम्हारे प्यार की सतरंगी धुनें,सदा
हर मौसम में बजतीं रहें,
सदा यूंही, हमारे जीवन को मह्कातीं रहें|

परिश्रमी और धीर व्यक्ति को संसार में कुछ भी अपाप्य नहीं है|

जिंदगी आज ख़त्म हो जाए,
हमें कोई गम नहीं,
क्योंकि हम जान चुके हैं,की
हम किसी से कम नहीं,
हमने जीवन में ,
जो चाहा,वो पाया है,
वो और बात है की,
हमें अपनों ने बहुत सताया है|

माता-पिता,गुरु और पीड़ितों की यथाशक्ति जीवनपर्यन्त सेवा करनी चाहिए|

Wednesday, January 6, 2010


ठण्ड पड़ रही है कड़ाके की,
कोहरे की घनी चादर से लिपटी है धरती,
बर्फ ने ढक रखा है,पर्वतों को,
हर मनुष्य मांग रहा पनाह इस सर्दी से,
मौसम के मिजाज़ का बदलने का इंतज़ार है,
हर किसी को,
जैसे किसी प्यासे को सावन का हो इंतज़ार,
थोड़ी सी धूप या कृपा सूर्यदेव की, राहतदे सकती है,
हर किसी को|

आशा और उम्मीद न छोड़ो तुम,
कभी किसी का दिल न तोड़ो तुम,
जीवन में,केवल खुशियों से ही नहीं
ग़मों से भी नाता जोड़ो तुम,
अपने दुःख-दर्द भूलकर,दूसरों 
के बारे में भी सोचो तुम,
खुद से कुछ पल दूर होकर,
प्रेम औरों में भी बांटों तुम|

Crystals,carpets and chandeliers make a nice house but only the smiles on the faces of the residents make it a home.

Tuesday, January 5, 2010

दिल की धड़कनों में तुम,
मेरे हर ख्वाहब में तुम,
मेरे हर सुख-दुःख में
मेरे साथ हो तुम,
जीवन के हर उतार-चडाव
मेरे बहुत पास हो तुम,
आसमान के तारे की तरह दूर हो,
फिर भी मेरे हृदय के करीब हो तुम|

True wisdom is freedom from self-esteem,hypocrisy and injury to others.

When you look at the bright side of things,you will keep on counting your blessings.And when you realize how truly blessed you are,you will not easily yield to irritation and annoyance.

जीना है तो जी लेंगें,कहतें हैं सभी,
पर मन ही मन सोचतें हैं,
क्या उनकी जिंदगी एक नई करवट लेगी कभी,
तमन्ना तो लाखों करते हैं,आसमान छूने की,
पर उनमें से कितने करतें हैं,प्रयत्न सच्चे दिल से,
यदि परिश्रम और लगन से जुट जाओ,
दृड़-निश्चय से मंजिल की ओर कदम बढाओ,
सारी कायनात देगी ,साथ तुम्हारा,
सफलता बाहें फैलाकर,स्वागत करेगी तुम्हारा|

God could not be present everywhere,so he created mothers.

Monday, January 4, 2010

Mind can be our best friend and by nurturing good thoughts,become an architect of our noble character and destiny.

निष्काम होकर नित्य परिश्रम करनेवालों की गोद में उत्सुक होकर सफलता विराजती है|
बांटने से कभी कम नहीं होता प्यार,
काश,कहीं मिलतीं खुशियाँ उधार,
सींचना पड़ता है उन्हें,भीतर से अपने
रंग भरके अनेक,सपनों में अपने
संगी-साथी और अपने साथ छोड़ने लगतें है,सब
हम बेवजह परेशान और उदास रहने लगतें हैं,जब
यदि, दूर करना चाहो,तुम अपने दुःख-दर्द और गम,
सदा हँसते-हंसाते रहो,दूसरों  में प्रेम बांटे रहो
बन जाएगी तुम्हारी,जिंदगी खुद एक सरगम|
Eyes are a wonderful gift given to human beings by God.It enables us to see the beautiful colours of life.

Sunday, January 3, 2010

तुम्हारे आ जाने पर,हर
लम्हा गुनगुनाने लगता है,
बगिया के फूलों पर बैठा,हर
भंवरा भी गाने लगता है ,
न जाने हर कली पर,कौनसा
जादू छाने लगता है,
तुम्हारे आने पर,हवाओं में
खुशबू का ख़ुमार सा लहराने लगता है|


जुदाई बहुत दुखदाई होती है,
चैन,दिल का करार सब छीन लेतीहै,दिल को चूर-चूर करती   है ,
दूरी अपनों से,मुश्किल जीना कर देती है,
जुदाई अपनों से चैन से मरनें भी कहाँ देती है|



समझ के भी न समझे हम कभी,
इस निष्ठुर दुनिया का चलन,
हंसने वाले का हँसना न भाए,
रोनेवाले के आंसू पोंछ न पाए,
बेरुखी ने इन दुनियावालों की,जीने न दिया,
दिल में हसरतों के फूलों को कभी,खिलने न दिया|
Wisdom is never a part of the curriculum of any management schools or institution,but can only be learnt on the job as one goes through life in its many shades.

Saturday, January 2, 2010

जिस प्रभु ने बनायाहै तुझे,
इंसान उससे तो डर ,
किसी का दिल दुखाना बेवजह बुरा है,
किसी मासूम की जान लेना उससे भी बुरा है,
देखकर उन जानवरों की आँखों में ,
मौत का डर,
लगा कुछ पल के लिए जैसे,
जिंदगी गई हो ठहर|

रात और दिन का हर पहर ,
बीत रहा है धीरे-धीरे,
जीवन का हर लम्हा,
बीत रहा है धीरे-धीरे
इंतज़ार तुम्हारा असहनीय 
हो चला है धीरे-धीरे
नींद पलकों से कोसों दूर जा चुकी,
कबकी धीर-धीरे
आँखें बरस-बरस कर थक चुकीं,
अब तो धीरे-धीरे|

Peace is sought as much by the rich as the poor.The poor need food and shelter for peace and the rich need peace despite having food and shelter.This is the paradox faced by almost everyone.

आसमान के रंग अनेक हैं,
कभी हलके हैं,तो कभी गहरे हो जातें हैं,
मनुष्य जीवन से भी गहरा लगाव है इन रंगों का,
खुशियों के रंग चटक,और ग़मों के रंग हलके लगने लगतें हैं,
अक्सर,हकीक़त के रंग बेरंग,और सपने सुनहरे लगनें  लगतें हैं|
अपने लिए तो सभी जीते हैं,दूसरों के लिए भी जीकर देखें|अपनी क्षमतानुसार निर्धन,अपाहिज और असहायों की सहायता करें|
 
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