Tuesday, July 12, 2011

हमारे शास्त्र कहतें हैं की मनुष्य के जीवन में श्रेष्ठ सुख सिर्फ सात्विक सुख है|भले ही इसकी प्रारम्भिक अनुभूति कष्टकारी हो,किन्तु भविष्य में इसका परिनाम सुखद ही होता है|