Monday, July 4, 2011

ईर्ष्या करनेवाले का सबसे बड़ा शत्रु उसकी ईर्ष्या ही है|दूसरे शत्रु उसका अहित करने से रह भी जाएं,परन्तु ईर्ष्या उसे हानि पहुंचा के ही रहती है|