Friday, December 24, 2010

कुछ रिश्ते न चलते हैं,आगे 
कुछ रिश्ते न बढते हैं,आगे
बस बदलता है,उनका रुख 
बस बदलती हैं,उनकी संवेदनाएं,
मन को आहत करने लगतीं हैं,
उनकी बदलती दिशाएँ,
न जाने क्यों,कभी-कभी 
सपने बुनने लगता है मन,किसी बेगाने के साथ,
तो,क्यों कोई अपना होकर भी,अपना लगता नहीं,
दिल खुद को कोसता है,तो  कभी वक़्त को,जो बदलता ही नहीं|
Your love towards others will soon form a lovely,thick slice of life and memories.