Sunday, December 19, 2010

बेटी के ससुराल जाते ही,
उसका दिल करने लगा फरियाद,
हर लम्हा रोने लगा,करके उसे याद,
मज़बूत बहुत करा मन को,
समझाया ज़माने का चलन,
पर,
इन आँसूओं के आगे,बेकार थे सब यत्न,
अब अपना था,उसके पिया का घर,
माँ-बाप का घर-अंगना छूट गया सब|