Tuesday, December 14, 2010

सपनों का शहर है,ये
कोई सपने बेच रहा,
तो कोई सपने खरीद रहा,
कोई सपने देख रहा,
तो कोई झूठे सपने दिखा रहा,
तुम्हारा प्यार का कैसा है असर,
सपनों में बसकर,आँखों के रस्ते,
हरपल,दिल में समां रहा|
Music washes away from the soul the dust of everyday life.