Thursday, November 18, 2010

प्रफ्फुलित करना है यदि अपने मन को,
खिलते हुए देखो,
फूलों को,
खिलते हुए देखो,
बचपन को,
उगते हुए देखो,
सूरज को,
नाचते हुए देखो,
वर्षा की मस्त बूंदों को,और 
चंचल यौवन की उड़ान को|
Where there is no choice,we do well to make no difficulty.