**Ritu Jain**
"MY IMAGINATION WILL GO FAR AND WIDE FROM ONE TIDE TO ANOTHER TIDE"
Thursday, November 11, 2010
उसका उपकार है,
हम नित पेट भर खातें है,
उसका उपकार है,
हम नित हँसते-मुस्कुराते हैं,
उसका उपहार है ये,
हम जब चाहें,गाते-गुन्गुनातें हैं,
हे प्रभु,ऐसे ही सदा अपनी कृपा बरसाते रहना,
हमारी हर साँस को नेक कार्यों में लगाए रखना|
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