There is more hunger for love and appreciation in this world than for bread.
Tuesday, September 21, 2010
क्यों तरसा है,उसका बचपन,
सदा माँ के प्यार को,
क्यों तरसा है,उसका कोमल मन,
सदा माँ के दुलार को,
न जाने कितने बसंत आए,
और आ कर चले गए,
हर वर्ष,अपनी एक नई परेशानी छोड़ गया,
हर अपना बेगाना,उस नन्ही सी बच्ची का,
निष्पाप सा दिल,बेवजह तोड़ गया,
कोई न जाना उसकी मन की अंतहीन पीड़ा को,
कोई न समझा,उस गरीब के घायल मन की व्यथा को,
क्यों तरसा है,उसका बचपन...........