Monday, September 20, 2010

ऐ दिल,ले चल कहीं दूर,
जहाँ कोई न हो,मजबूर,
ऐ दिल,ले चल वहाँ,
जहाँ हो प्यार की ठंडी छाँव,
कोई न छेड़े,गम के तराने जहाँ,
हर किसी के दिल में,खिलें हो फूल जहाँ,
संतोष,शान्ति,और संयम का डेरा हो,
असंतोष और अशांति का न अँधेरा हो,
ऐ दिल,ले चल कहीं दूर,
जहाँ,समुद्र का किनारा हो,
और हर सुकून भरा पल हमारा हो,
जिंदगी की दौड़-धूप से दूर,
जहाँ हवाएं गातीं हों,प्रेम के तराने,
हर किसी के चेहरे पर मुस्कुरुराने के हो अनगिनत बहाने,
ऐ दिल ले चल..............

प्रेम वसंत समीर है,तो द्वेष ग्रीष्म की लू के समां है|
keep the atmosphere at home calm and peaceful.Let there be a lot of love and positive energy flowing.