**Ritu Jain**
"MY IMAGINATION WILL GO FAR AND WIDE FROM ONE TIDE TO ANOTHER TIDE"
Friday, September 17, 2010
दीन-दुखियों के लिए,कुछ
कर पाओ,तो सार्थक है जीवन तुम्हारा,
बेसहारों का बन पाओ,तुम
जो सहारा,तो सार्थक है जीवन तुम्हारा,
किसी की खोई हुई खुशियाँ,लौटा पाओ
तो सार्थक है,जीवन तुम्हारा,
किसी के अधूरे सपनों को,जो पूरा
कर पाओ,तो सार्थक है जीवन तुम्हारा|
परपीड़ा को देखकर,मन में दया न आय|
वह मानव-'मानव'नहीं,वह 'पत्थर'कहलाय|
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