Friday, August 27, 2010


मस्तिष्क के हज़ारों नेत्र होतें हैं और हृदय का एक,परुन्तु प्रेम के समाप्त होते ही सम्पूर्ण जीवन का प्रकाश समाप्त हो जाता है|
बुडापे ने,तन को असहाय बना दिया,
बुडापे ने,बहुत से अपनों का प्रेम छुड़ा दिया,
जो बच्चे दम भरते थे,बुडापे में अंधे की लाठी बनने का,
वक़्त आने पर,उन सबने अंगूठा दिखा दिखा दिया,
अपना ही शरीर क्षीण होकर दगा देने लगा जब,
उसके सगे ही,धीरे-धीरे उससे दूर जाने लगे सब|