Monday, July 26, 2010

क्यों कभी-कभी अपने ही आंसू 
झूठे लगते हैं,
और दूसरों की मुस्कान फीकी,
धुंधले लगते हैं,फिर सब रिश्ते-नाते 
कसमे-वादे सब जैसे,
खुली आँखों के सपने,
अपनेपन का दम भरनेवाले,
सब हैं,बेमुरव्वत ,अपने|
The heights by great men reached and kept
Were not attained by sudden flight,
But they,while their companions slept,
Were toiling upward in the night.
It is human to hate those whom we have injured.
एक पेड़ पर दो बाज प्रेमपूर्वक 
रहते थे दोनों शिकार की तलाश में निकलते और जो भी पकड़कर लाते उसे शाम को मिल बाँट कर खाते |बहुत दिन से उनका यही  क्रम चल रहा था |
एक दिन दोनों शिकार पकड़कर लौटे तो एक चोंच में चूहा था और दूसरी चोंच में साँप | शिकार दोनों हम तब तक जीवित थे | पेड़ पर बैठकर बाजो ने जब उनकी पकड़ ढीली कीतो साँप ने चूहे कोदेखा और चूहे ने साँप को |
साँप चूहे का स्वादिष्ट भोजन पाने के लिए जीभ लपकाने लगा और चूहा साँप के प्रयत्नों को देखकर अपने पकड़ने वाले बाज के डैनो में छिपने का उपक्रम करने लगा |
उस दृश्य को देखकर एक बाज गंभीर हो गया और विचार मग्न दिखने लगा , दुसरे ने उससे पूछा -दोस्त दार्शनिको की तरह किस चिंतन -मनन में डूब गये?
पहले बाज ने अपने पकड़े हुए साँप की ओर संकेत करते हुए खा कि देखते नही यह कैसा मुर्ख प्राणी है |जीभ को लिप्सा के कारण यह मौत का भी विस्मरण कर रहा है |
दुसरे बाज ने अपने चूहे की आलोचना करते हुए कहा- और इस नासमझ को भी देखो भय  इसे प्रत्यक्ष मौत से भी अधिक डरावना लगता है |
पेड़ के नीचे एक मुसाफिर सुस्ता रहा था |उसने दोनों की बाते सुनी और एक लम्बी साँस छोड़ते हुए बोला - हम मानव प्राणी भी साँप और चूहे की तरह स्वाद और भय को बड़ा समझते है , मौत तो हमें विस्मरण रहती है |

 Once we simplify life and take decisions from deep within,infuse discipline in our lives and stop enacting dramas in our  relationships we are  at peace Once at peace and free,happiness happens.Life becomes an expression of divine  calmness and flows with eternal grace.