Tuesday, July 20, 2010

क्यों आवाज़ नहीं होती,
सूरज के उगने की,
चाँद के छुपने की,
तारों के टिमटिमाने की,
किसी को दिल से चाहने की,
फिर दर्दे-दिल बढ जाने की,
किसी की तरफ मुस्कुराने की,
रिश्तों में कडवाहट आने की,
फिर दिल के चुपके-चुपके रोने की,
हाय,क्यों आवाज़ नहीं होती,
अपनों की बेरुखी से,
दिल के हज़ार टुकड़ों में बिखर जाने की|
Realize that you are a human-being,and as such you can and you will make mistakes.Yur mistakes can be forgiven if you are sorry about them,and you can forgive yourself too.
तुम्हारा साथ है तो,
गुनगुनाता रहेगा यह आसमान सदा,
है साथ तुम्हारा,
गाती रहेंगी ये हवाएं,नए तराने सदा,
तुम पास हो,
खिलते रहेंगे,सुंदर फूल चमन में,
तुम्हारे पास होने से ही तो,
प्रेम की बांसुरी,बजने लगती है मन में|
Short as life is,we make it still shorter by the careless waste of time.