Tuesday, June 22, 2010

तुम्हारी मनमोहक मुस्कान देखकर,ऐसा लगा
जैसे हर सपना जो इन आँखों ने देखा था,
तुम्हारे लिए,वो सच हो गया,
तुम्हे खुश देखकर ऐसा लगा,जैसे बरसों की 
मेहनत हमारी व्यर्थ नहीं हुई,
माझी की नाव भी किनारे लग जाएगी,
संतोष है तो इस बात का,
तुम्हे अपनी मंजिल मिल ही गई|
Trust yourself and listen to your inner voice and entrust faith in close ones to strengthen the relations with parents,teachers,friends and others.