Friday, March 12, 2010

In prosperity your friends know you,in Adversity you know your friends.
लोभ के कारण पाप होतें हैं,रस के कारण रोग होतें हैं और स्नेह के कारण दुःख होतें हैं|इसलिए लोभ,रस और स्नेह का त्याग ही मनुष्य को सुखी बना सकता है|
कण-कण में जो समाया है,
वो भगवान् है,
जिसने सकल सृष्टि को बनाया है,
वो भगवान् है,
इस जग का जो पालनहार है,
वो भगवान् है,
हम सब की जो रक्षा कर रहा है,
वो भगवान् है|