Wednesday, January 6, 2010


ठण्ड पड़ रही है कड़ाके की,
कोहरे की घनी चादर से लिपटी है धरती,
बर्फ ने ढक रखा है,पर्वतों को,
हर मनुष्य मांग रहा पनाह इस सर्दी से,
मौसम के मिजाज़ का बदलने का इंतज़ार है,
हर किसी को,
जैसे किसी प्यासे को सावन का हो इंतज़ार,
थोड़ी सी धूप या कृपा सूर्यदेव की, राहतदे सकती है,
हर किसी को|

आशा और उम्मीद न छोड़ो तुम,
कभी किसी का दिल न तोड़ो तुम,
जीवन में,केवल खुशियों से ही नहीं
ग़मों से भी नाता जोड़ो तुम,
अपने दुःख-दर्द भूलकर,दूसरों 
के बारे में भी सोचो तुम,
खुद से कुछ पल दूर होकर,
प्रेम औरों में भी बांटों तुम|

Crystals,carpets and chandeliers make a nice house but only the smiles on the faces of the residents make it a home.