Wednesday, September 15, 2010

हर कली को एक दिन खिलना है,
खिलकर मुरझाना भी है,
हर सुबह को,शाम ढलते ही,
अँधेरी रात में बदलजाना है,
हर किसी जन्म लेने वाले इंसान को,
इक दिन संसार छोड़ अवश्य जाना है,
याद रखे ये अटल सत्य,यदि हर मनुष्य
उसे अपनी बहुत सी उलझनों से,
छुटकारा मिल जाना है|

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