Sunday, July 25, 2010

न जाने कैसे,निर्मोही हैं आप,
हमारा दिल बेवजह दुखातें हैं 
कैसे बताएं,
हमारे रोने और हंसने,दोनों की वजह आप हैं,
हमारे जीने,और आपकी बेरुखी,
से अनगिनत बार मरने की वजह भी आप ही हैं|

2 comments:

  1. अनगिनत बार मरने की वजह भी आप ही हैं|'
    सुन्दर अभिव्यक्ति .. व्यथित मन का चित्रण

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