Saturday, July 3, 2010

वोह हमारी आँख का आंसू था,
जिसे तुमने समझ लिया पानी था,
वोह दस्तान थी,एक चोट खाए दिल की,
जिसे तुमने  समझा  एक किस्सा था,
चाहकर भी,हम अपना
हाले-दिल तो न समझा पाए तुम्हे,
लाख कोशिशों के बाद भी,
अपने जीवन की किताब के हर पन्ने पर लिखा,
तुम्हारा  नाम,दिखा भी न पाए तुम्हे|

3 comments:

  1. आपका दर्द साफ झलक रहाँ है । कभी हमारे ब्लाग पर भी आईये ।


    comments by:umesh yadav & Rajeshwar yadav

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  2. आपकी रचना के लिए एक शब्द है मेरे पास......... बेहतरीन!

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  3. Don't reflect your pain for those who doesn't understand its value,but sooner or later they will.
    Little sis

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