वोह हमारी आँख का आंसू था,
जिसे तुमने समझ लिया पानी था,
वोह दस्तान थी,एक चोट खाए दिल की,
जिसे तुमने समझा एक किस्सा था,
चाहकर भी,हम अपना
हाले-दिल तो न समझा पाए तुम्हे,
लाख कोशिशों के बाद भी,
अपने जीवन की किताब के हर पन्ने पर लिखा,
तुम्हारा नाम,दिखा भी न पाए तुम्हे|
आपका दर्द साफ झलक रहाँ है । कभी हमारे ब्लाग पर भी आईये ।
ReplyDeletecomments by:umesh yadav & Rajeshwar yadav
आपकी रचना के लिए एक शब्द है मेरे पास......... बेहतरीन!
ReplyDeleteDon't reflect your pain for those who doesn't understand its value,but sooner or later they will.
ReplyDeleteLittle sis