Wednesday, February 17, 2010

बादल को बेसब्री से इंतज़ार रहता है,
जम के बरसने का,
सूरज की किरणों को इंतज़ार रहता है,
धूप बनके बिखरने का,
कलियों को सदा इंतज़ार रहता है,
फूल बनके खिलने का,
हमारे दिल को सदा इंतज़ार रहता है,
तुम्हारे आ जाने का|

1 comment:

  1. ऋतुजी जैन
    आपकी रचना को पढ़ अच्छा लगा!
    आप जैन है " हे प्रभु" हिंदी ब्लॉग में जैन धर्म से संबधित नियमित कुछ ना कुछ प्रसारित होता है. सहयोग एवं समय प्रदान करे!

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