Saturday, February 13, 2010

दीप खुशियों के यूहीं जलाते रहना तुम,
मुस्कराहट अपनी यूहींलुटाते रहना तुम,
हमसे दूर रहो या पास,हृदय में हर किसी के 
खुशियों के फूल खिलाते रहना तुम| 

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