Wednesday, December 9, 2009

जीवन नाम है,कुछ पाने और कुछ खोने का,
कहीं थोड़ी सी उम्मीद और आशा,
तो कहीं थोड़ी सी निराशा भी,
कभी खिलती है खुशियों की धूप,
तो कभी मिलती है ग़मों की छाँव भी,
निराश न हो प्राणी,
जीना-मरना तो उसके हाथ है,
हार-जीत अंतिम दाँव नहीं|

Those who bring the sunshine of happiness to others cannot keep it away from themselves.

ठंडी हवा बहती है धीरे-धीरे,
ठंडी हवा कुछ कहती है,
कानों में धीरे-धीरे,
कितना सुकून देती है मन को,
ठंडक कितनी देती है तन को,
पूछा मैंने,रहती हो कहाँ?
इठलाती हुई बोली,
तुम जहाँ जाओगी,
मुझे वहाँ पाओगी|