**Ritu Jain**
"MY IMAGINATION WILL GO FAR AND WIDE FROM ONE TIDE TO ANOTHER TIDE"
Wednesday, November 11, 2009
चलो कुछ तो मन हल्का हो गया,
कह कर मन की बात तुमसे,
न जाने कब से ढो रहे थे ,
बोझ तुम्हारी नासमझी का,
तुम्हारे लबों पर देखने को एक मुस्कान,
कितनी खुशियों के पल गँवाए है ,हमने
तुम्हारी खातिर,हमने रौंदे हैं सपने कितने|
You are a loser in life,if you often ruin the happiness of others.
कभी-कभी सरिता के तट तक आकर भी ,
पंछी प्यासा लौटा जाए,
जैसे कोई सोई पीर जग जाए,
और बुझी हुई आग फिर जग जाए,
होली हो अरमानों की,और नैनों के
नील सरोवर में,आँसू के कमल मुस्काये|
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