Wednesday, November 11, 2009

चलो कुछ तो मन हल्का हो गया,
कह कर मन की बात तुमसे,
न जाने कब से ढो रहे थे ,
बोझ तुम्हारी नासमझी का,
तुम्हारे लबों पर देखने को एक मुस्कान,
कितनी खुशियों के पल गँवाए है ,हमने
तुम्हारी खातिर,हमने रौंदे हैं सपने कितने|

You are a loser in life,if you often  ruin the happiness of others.

कभी-कभी सरिता के तट तक आकर भी ,
पंछी प्यासा लौटा जाए,
जैसे कोई सोई पीर जग जाए,
और बुझी हुई आग फिर जग जाए,
होली हो अरमानों की,और नैनों के 
नील सरोवर में,आँसू के कमल मुस्काये|