Saturday, October 10, 2009

गरीबी एक श्राप की तरह न जाने,
कितनी जिंदगियों से जुडी है,
भूख-प्यास से बेहाल हैं,
कितने बदनसीब,न मिला कभी,
ढंग का कपड़ा,न पेट भर रोटी,
तंगहाली में जीवन जीने की विवशता,
और उनकी खोटी किस्मत ने न जाने,
दफ़न किएँ हैं,उनके कितने अधूरे सपने|

Selfishness should be rejected and selflessness should be warmly accepted.Thus,one can find true meaning in life.
प्रफुल्लित करता है,नन्ही-नन्ही,
वर्षा की बूंदों का धरती पर गिरना,
प्यासी धरती के ऊपर ,
काले मेघों का गरजना और बरसना,
विशाल नीले अम्बर पर,सूरज ,
चाँद और तारों का आंखमिचौनी खेलना,
पहाड़ों की बर्फ का पिघलकर,नदी,झरने,
तालाब बनकर,सागर की गोद में समां जाना |