Saturday, September 5, 2009

रात हुई ,हुआ सवेरा,
दूर-दूर तक मिट गया अँधेरा,
सागर की गहराइयों से,
चुन पाये कुछ ही मोती,
रह गयीं बहुत सी उलझनें,
मन में अनसुलझी सी,
जीने की आस ने छोडा न
उसका दामन इक पल के लिए,
शायद,इसलिए दुनिया से लड़
पायी ,वो हक से जीने के लिए।
The most important reality of life,however,is to see others as if they were an essential part of your spiritual growth.