Thursday, August 20, 2009

मेरे देश की मिट्टी जैसी और कहाँ,
बहता गंगा-जमुना जैसी पवित्र नदियों का जल यहाँ ,
सर्प को मानते देवता,गायों को मिलता माँ का दर्जा यहाँ,
हर मंदिर है दर्शनीय,श्रीकृष्ण जी का गाँव यहाँ,
प्यार बसता है हर दिल में जहाँ,मेरा देश है वहाँ ।
We are all surrounded by people who are forever trying to control us,judge us and make us feel guilty about who we are and what we do.We must learn the art of dodging these guilt traps.