Thursday, June 25, 2009

Most negative feelings we associate with difficulties are of our own making.
गिले शिकवे करता रहा ,इंसान
कभी दूसरों से ,तो ख़ुद से कभी,
सब कुछ पाकर ,कोसा कभी
किसी के वादों को,
तो कभी किसी के इरादों को,
सोचता रहा ,जीवन भर
क्यों मेरे सपने अधूरे रह गए सभी,
विचलित होकर बोले भगवन,
हर जीव-जंतु से अधिक दिया तुम्हे
फिर क्यों तुम संतुष्ट हुए न कभी।
Every unpleasant experience is a package which hides a wealth of wisdom and strength.
प्यार देखकर ,अपने लिए आंखों में तुम्हारी,
नतमस्तक हो गए हम,
खुशियाँ दी हैं तुमने, हमारे दिल को इतनी,
किभूल गए हम अपने गम,
काश ,ज़िन्दगी का हर पल बिता पाते,
तुम्हारे साथ हम।