Tuesday, April 14, 2009

Poverty and illetracy are two great sins of Indian society.
There is a distinction between thinking and worrying.Thinking is essential;worrying is unnecessary.
जीवन का प्रत्येक दिन उत्सव मान कर जियो ,सच्चा सुख प्राप्त होगा ।
प्रभु न दंड किसी को देता है ,
प्रभु न माफ़ किसी को करता है,
वह तो कर्म फल तराजू में तौलकर ,
बस इन्साफ करता है ।
आशा और उम्मीद का दामन तुम न छोड़ना कभी , दिल किसी का तुम न तोड़ना कभी ,
भूल कर अपने दुःख दर्द सभी , किसी के काम आ सको , तो आ कर देखना कभी।
ज़िन्दगी की डगर पर आसान नही चलना ,तुम बिन,

मेरे सपनो का मुमकिन नहीं हकीक़त में बदलना ,तुम बिन ,

क्या करू कुछ नहीं सूझता ,तुम बिन,

यह दिन , यह रैन कटते है ,तुम बिन