Sunday, December 20, 2009

तुम्हारा साथ क्या छूटा,
लगा जैसे धरती और आसमान 
दोनों तनहा हो गए,
चाँद छुप गया बादलों में,
और तारे कहीं खो गए,
तुम क्या गए,जिंदगी से हमारी,
हम तो जीते-जी एक बुत के समां हो गए|

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