"MY IMAGINATION WILL GO FAR AND WIDE FROM ONE TIDE TO ANOTHER TIDE"
Saturday, November 14, 2009
फलों से लदे हुए,
उनके बोझ से झुके पेड़ से पूछा,
किसी ने,क्या तुम्हे
झुकने की मिली है सजा,
पेड़ विनम्रता से बोला,
तुम क्या जानो ,
जीवन में ,झुक के चलने
में,क्या है मज़ा|
वाकई झुककर चलने मे जो मजा है वो तनकर खडे होने मे नही है
ReplyDeleteसुन्दर भाव