Sunday, November 22, 2009

जिंदगी देती है अवसर  बहुत इंसान को,
इंसान बनने के,
कोई क्या करे,जब इंसान खुद न चाहे ,
इंसान बनने को,
जानवर और इंसान में  फर्क बहुत कम है,
इंसान ये क्यों नहीं समझता,
यह सोच के,कभी-कभी आँखें हो जाती नम हैं|


1 comment:

  1. असल में इन्सान एक भ्रम में जीता हैं,जबकि उसे अगले पल की खबर तक नहीं,फिर भी वो जिन्दगी के नशे में इस कदर चूर रहता है,कि भूल जाता है कि वो तब साथ छोड़ देती है जब इन्सान जानवर से इन्सानियत की ओर पहला कदम रख चुकता है ।
    बहुत-बहुत प्यार,
    छोटी बहन

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