Sunday, October 4, 2009

रात से कह दो,न रहे किसी गलतफहमी में,
सुबह होगी ज़रूर,
अन्धकार से कह दो,न रहे भ्रम में,
सूरज चमकेगा ज़रूर,
निराशा से कह दो,इतना न करे गुरूर ,
आशा की रोशनी बिखरेगी ज़रूर,
गम के कोहरे से कह दो,
खुशियों की धूप खिलेगी ज़रूर|

1 comment:

  1. खुशियों की धूप खिलेगी ज़रूर

    एक एक शब्द आपने मोतियों की तरह पिरो दिया है

    http://dunalee.blogspot.com/

    ReplyDelete