Friday, June 19, 2009

चाँद ने कहा,इठलाकर
सूरज से ,
चांदनी से अपनी ,मैंने
जग को कितनी शीतलता दी है,
विनम्र होकर बोला सूरज,
अंधेरे को हटाकर,मैंने
जग को रोशनी से भर दिया है,
हर फूल,हर कली को नवजीवन दिया है.

2 comments: