हमे अक्सर सताती हैं,बचपन की यादें,
अपने संगी-साथियों के संग ,बतियाते
बिताये ,अनगिनत दिन और रातें ,
वो बारिश में ,कागज़ की नांव बहाना ,
गुड्डे -गुडियों का ब्याह रचाना,
बागों में रंग-बिरंगी तितलियों को पकड़ना ,
न रिश्तों का बन्धन ,न कोई फ़िक्र ,न परेशानी,
वो अल्हड सा जीवन ,वो सावन के झूले,
वो चाँद को मामा कहकर बुलाना ,हम आज तक न भूले,
वो बचपन की मौज-मस्ती कैसे कोई भूले.
chand ko mama bulana is really cute
ReplyDeletegreat....Gitu
Thanks for your love and encouragement.
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